राजस्थान, जो अपने विशाल रेगिस्तानी इलाकों और कठिन जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, अब कृषि क्षेत्र में एक नई हरित क्रांति की ओर बढ़ रहा है। राज्य में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने के लिए सरकार और किसान मिलकर नए प्रयोग कर रहे हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है।
जैविक खेती का मूल उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को समाप्त कर प्राकृतिक तरीकों से फसल उत्पादन करना है। राजस्थान के अलवर, सीकर, भीलवाड़ा, उदयपुर और बांसवाड़ा जैसे जिलों में अब किसान गोबर खाद, नीम की खली, और जैव उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। इन प्राकृतिक विधियों से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और पोषण स्तर भी बढ़ता है।
राजस्थान सरकार ने “राजस्थान जैविक खेती मिशन 2025” की शुरुआत की है, जिसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, सब्सिडी और प्रमाणन की सुविधाएं दी जा रही हैं। इस योजना का उद्देश्य 5 लाख हेक्टेयर भूमि को अगले तीन वर्षों में जैविक खेती के अंतर्गत लाना है। सरकार किसानों को बाजार तक सीधा संपर्क देने के लिए ई-मंडी और किसान पोर्टल जैसी डिजिटल सुविधाओं का भी उपयोग कर रही है।
जैविक उत्पादों की मांग अब देश और विदेश दोनों में तेजी से बढ़ रही है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहरों में जैविक बाजार और ऑर्गेनिक स्टोर तेजी से खुल रहे हैं। यहां पर स्थानीय किसान अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं को बेच सकते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिलता है। इससे “फार्म टू फोर्क” मॉडल को भी बढ़ावा मिल रहा है।
इसके अलावा, राजस्थान में कई स्टार्टअप और NGOs भी जैविक खेती को प्रोत्साहित करने में जुटे हैं। वे किसानों को प्रशिक्षण, बीज चयन, और जैविक प्रमाणन के बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही, कुछ विश्वविद्यालयों में ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर पर शोध कार्य भी चल रहे हैं, जो इस क्षेत्र को और मजबूत बना रहे हैं।
जैविक खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है। मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, जल स्रोतों में प्रदूषण नहीं होता और फसलें कीट-प्रतिरोधी बनती हैं। यह खेती जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी मददगार साबित हो रही है।
कुल मिलाकर, राजस्थान में जैविक खेती अब सिर्फ एक वैकल्पिक पद्धति नहीं, बल्कि एक सतत और लाभदायक कृषि मॉडल के रूप में उभर रही है। यह पहल न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित पर्यावरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
Author: News Desk
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