दिल्ली में हर सर्दी के साथ वायु प्रदूषण भयावह रूप ले लेता है, और इस साल भी हालात अलग नहीं हैं। मॉनसून के बाद भले ही प्रदूषण धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन असली संकट तब शुरू होता है जब तापमान तेजी से गिरने लगता है। इस समय शहर घने धुंध की परत में दबा हुआ है और AQI 400 से पार कर रहा है, जिसे ‘severe’ श्रेणी माना जाता है। यह स्थिति स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरनाक है। राजधानी के कई हिस्सों में “We Can’t Breathe” जैसे नारों के साथ लोग सड़कों पर उतर आए। इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन हुए, जहां लोग गैस मास्क पहनकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कुछ जगह प्रदर्शनों के दौरान तनाव बढ़ गया और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और पेपर स्प्रे करने की घटनाएं भी सामने आईं।
सर्दियों के आते ही तापमान में तेज गिरावट होती है, जिसके कारण हवा भारी और स्थिर हो जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही स्थिर हवा प्रदूषकों को जमीन के पास फंसा देती है। इसे ‘इन्वर्ज़न लेयर’ कहा जाता है, जिसमें ऊपर की ठंडी हवा प्रदूषण को ऊपर उठने नहीं देती। CPCB और IMD के 1 अक्टूबर से 5 दिसंबर 2025 तक के डेटा से स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे तापमान गिरता है, AQI बढ़ता जाता है। अक्टूबर में जहां तापमान 22 से 25 डिग्री के बीच रहता है, वहां प्रदूषण का असर हल्का होता है। लेकिन जैसे ही तापमान 20 डिग्री से नीचे आता है, हवा की गति कम हो जाती है और प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगता है।
अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली में हल्की धूप और कम प्रदूषण महसूस होता है। शुरुआती AQI 80 से 150 के बीच रहता है। लेकिन जैसे-जैसे महीने के अंत में तापमान 18–20 डिग्री तक पहुंचा, AQI तेजी से 230 से 310 तक पहुंच गया। 30 अक्टूबर को AQI 373 दर्ज किया गया, जो इस सीजन का पहला गंभीर स्मॉग स्पाइक था। इस दौरान पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं, जो प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
नवंबर में स्थिति और खराब हो जाती है। महीने की शुरुआत में तापमान 16–19 डिग्री था, और AQI 290–360 के बीच बना रहा। लेकिन जैसे ही तापमान 10–12 डिग्री तक गिरा, दिल्ली ने इस साल के सबसे खराब AQI देखे। 11 नवंबर को AQI 428, 12 नवंबर को 418 और 13 नवंबर को 404 दर्ज किया गया। महीने के अंत में तापमान 8–10 डिग्री तक आ गया, और AQI लगातार 350–390 के बीच मंडराता रहा।
दिसंबर की शुरुआत में शहर में ठंड ने पूरी तरह दस्तक दे दी है। तापमान 5–6 डिग्री तक गिर चुका है और AQI 300 से 370 के बीच बना हुआ है। ठंडी और स्थिर हवा प्रदूषण को और नीचे दबाती है, जिससे हवा में फैलाव लगभग रुक जाता है। इसका मतलब है कि दिसंबर के आगे बढ़ने के साथ प्रदूषण और खराब हो सकता है, क्योंकि न तो हवा साफ होती है और न ही गर्म होती है।
कुल मिलाकर, दिल्ली का भूगोल, ठंडी और धीमी हवाएं, वाहन व औद्योगिक धुआं, पराली और धूल—इन सभी के संयोजन से हर सर्दी में दिल्ली एक गैस चैंबर में बदल जाती है। तापमान जितना गिरता है, प्रदूषण उतना बढ़ता है, और यही वजह है कि नवंबर–दिसंबर राजधानी के लिए सबसे संकटपूर्ण महीने बन जाते हैं।
Author: News Desk
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