प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के 23वें संस्करण में संबोधित करते हुए कहा कि पुराने समय में भारत की धीमी आर्थिक वृद्धि को ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ कहना हिंदू आस्था को बदनाम करने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि इसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत धर्म पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि आज जब दुनिया विभाजित और अस्थिर है, भारत एक ‘ब्रिज बिल्डर’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय संकट, महामारी और अविश्वास के माहौल के बावजूद भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है, और दुनिया जब मंदी की बात करती है, तब भारत विकास की नई कहानियाँ लिखता है।
प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछली व्यवस्था को अपने ही नागरिकों पर विश्वास नहीं था, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे बदलते हुए कई प्रक्रियाओं में सेल्फ-अटेस्टेशन को मान्य कर आम जनता को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार में नागरिकों का विश्वास सबसे बड़ा पूंजी है और भारत को हर स्तर पर औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करना आवश्यक है।
जन विश्वास बिल के तहत किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि छोटे विक्रेताओं, फेरीवालों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अब तक 37 लाख करोड़ रुपये के बिना गारंटी वाले ऋण दिए जा चुके हैं। यहां तक कि जो लोग सिर्फ 1,000 रुपये भी चाहते हैं उन्हें बिना किसी गारंटी के लोन दिया जा रहा है। इसे उन्होंने “जनता पर विश्वास वाली शासन व्यवस्था” बताया।
प्रधानमंत्री ने अनक्लेम्ड पैसे के मुद्दे पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि
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78,000 करोड़ रुपये बैंक खातों में,
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14,000 करोड़ बीमा कंपनियों में,
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3,000 करोड़ म्यूचुअल फंड्स में,
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9,000 करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में पड़े हुए हैं।
सरकार विशेष कैंप लगाकर यह पैसा नागरिकों तक वापस पहुँचा रही है। उन्होंने कहा, “यह मोदी लोगों को ढूंढ-ढूंढकर उनका हक लौटाने में लगा है।”
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने भावुक अपील की कि नागरिकों को 2035 तक “मैकॉले की गुलामी वाली मानसिकता” से मुक्त होना होगा। हाथ जोड़कर उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य सरकार अकेले हासिल नहीं कर सकती, बल्कि इसके लिए पूरे देश को साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा।
Author: News Desk
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