नई दिल्ली:
पाकिस्तान के बलोचिस्तान क्षेत्र से भारत के प्रति खुला समर्थन सामने आया है। प्रमुख बलोच नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखते हुए भारत के लिए “Unwavering Support To Bharat” दोहराया है और पाकिस्तान-चीन गठजोड़ को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है।
अपने पत्र में मीर यार बलोच ने दावा किया कि बलोचिस्तान दशकों से पाकिस्तान के दमन, राज्य प्रायोजित हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन और पाकिस्तान के बीच गहराता रणनीतिक गठबंधन बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) अब अपने अंतिम चरण में है।
चीन की सेना तैनाती की आशंका
मीर बलोच ने आशंका जताई कि आने वाले कुछ महीनों में चीन बलोचिस्तान में अपने सैन्य दस्ते तैनात कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बलोचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता सेनाओं को नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीनी सेना की मौजूदगी पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व खतरा बन सकती है।
उनका कहना है कि 6 करोड़ बलोच लोगों की इच्छा के बिना बलोच भूमि पर “चीनी बूट्स” का उतरना भारत और बलोचिस्तान—दोनों के भविष्य को गंभीर चुनौती देगा।
भारत को खुला समर्थन, ऑपरेशन सिंदूर की सराहना
नववर्ष संदेश में मीर यार बलोच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2025 में की गई ऑपरेशन सिंदूर की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत की कार्रवाई साहस, दृढ़ता और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं
मीर बलोच ने भारत के 140 करोड़ नागरिकों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया और नागरिक समाज को नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत और बलोचिस्तान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) को साझा विरासत का प्रतीक बताया।
बलोचिस्तान की स्वतंत्रता और वैश्विक कूटनीति
गौरतलब है कि बलोच राष्ट्रवादी नेताओं ने मई 2025 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता की घोषणा की थी। मीर बलोच ने यह भी ऐलान किया कि 2026 की शुरुआत में “Balochistan Global Diplomatic Week” मनाया जाएगा, ताकि बलोचिस्तान सीधे दुनिया के देशों से संवाद स्थापित कर सके।
CPEC पर भारत की आपत्ति
जहां चीन और पाकिस्तान CPEC को महज आर्थिक परियोजना बताते रहे हैं, वहीं भारत लगातार इसका विरोध करता आया है। भारत का कहना है कि यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरती है, जो उसकी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
मीर यार बलोच का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और भारत के प्रति बलोच नेतृत्व का खुला समर्थन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
Author: News Desk
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