Rajasthan TV Banner

 Anita Jha Lawyer Story-चार पहियों पर 13 साल: मधुबनी की वकील अनीता झा, जिनका चैंबर कोर्ट में नहीं, कार की पिछली सीट पर चलता है

Anita Jha Lawyer Story

 

बिहार के मधुबनी की रहने वाली 57 वर्षीय अधिवक्ता अनीता झा पिछले 13 वर्षों से अपनी कार की पिछली सीट को ही अपना चैंबर बनाए हुए हैं। वह न तो किसी कमरे में बैठकर मुवक्किलों से मिलती हैं और न ही किसी आधिकारिक चैंबर में, बल्कि जिला अदालत की पार्किंग में खड़ी अपनी कार से ही मुकदमों की तैयारी करती हैं, सलाह देती हैं और कानूनी रणनीति बनाती हैं।

अनीता झा पिछले 28 वर्षों से वकालत कर रही हैं। उनका कहना है, “मेरे पास कोई घर नहीं है। जो कुछ भी मेरा है, वह इसी कार में है—मेरा काम, मेरी पहचान, मेरी पूरी जिंदगी।”

हर कार्यदिवस की सुबह करीब 10 बजे उनकी सफेद हैचबैक मधुबनी जिला अदालत परिसर में अपने तय स्थान पर पहुंचती है। कार रुकते ही मुवक्किलों की भीड़ जुट जाती है। यही कार उनका चलता-फिरता दफ्तर है, जहां दिन के 10–11 बजे से लेकर शाम करीब 5 बजे तक वह काम करती हैं।

चैंबर मांगा, अपमान मिला

अनीता बताती हैं कि अदालत परिसर में महिला वकीलों के लिए बने चैंबर पर पुरुष वकीलों का कब्जा हो गया। वर्ष 2013 में जब महिला वकीलों के लिए चैंबर का उद्घाटन हुआ, तो कुछ ही दिनों में उसका बोर्ड हटा दिया गया और वहां पुरुष वरिष्ठ वकीलों के नाम लगा दिए गए।

उन्होंने बताया कि 2011 में महिला वकीलों के लिए चैंबर की मांग उठाई गई थी और इसके लिए करीब 15 लाख रुपये भी एकत्र किए गए थे, लेकिन आज तक वह चैंबर महिलाओं को नहीं मिला। विरोध करने पर उन्हें अपमान और तानों का सामना करना पड़ा। उनकी मेज और कुर्सी तक हटा दी गई।

कार बना प्रतिरोध का प्रतीक

लगातार उत्पीड़न के बाद अनीता ने अदालत छोड़ने का भी सोचा, लेकिन बाद में उन्होंने तय किया कि वह यहीं रहकर लड़ेंगी। तभी उन्होंने अपनी कार को ही चैंबर बना लिया। उनके लिए यह कार सिर्फ दफ्तर नहीं, बल्कि लिंग भेद के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गई।

वह बताती हैं कि अदालत परिसर में साफ शौचालयों की कमी के कारण वह कई-कई घंटे पानी तक नहीं पीतीं। “पूरे दिन कोर्ट में रहती हूं, लेकिन गंदे शौचालय के डर से पानी नहीं पीती,” वह कहती हैं।

गुलाबी से सफेद कार तक का सफर

2013 में उन्होंने अपनी सास की गुलाबी जेन कार से काम शुरू किया। बाद में मां की लाल कार को चैंबर बनाया और आखिरकार 2022 में अपनी कमाई से सफेद हैचबैक खरीदी, जो आज उनका स्थायी कार्यालय है।

पिता की प्रेरणा, संघर्षों से भरा सफर

1968 में जन्मी अनीता झा के पिता अदालत में कार्यरत थे। उन्होंने ही अनीता को कानून पढ़ने के लिए प्रेरित किया। 1989 में उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई शुरू की और उस समय वह अपने बैच की इकलौती महिला थीं।

2013 में पति के निधन के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। वह कहती हैं कि विधवा होने के बाद लोगों का रवैया और भी कठोर हो गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अपने करियर में वह लगभग 20,000 मामलों का निपटारा कर चुकी हैं। वर्तमान में वह पोक्सो एक्ट, दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवादों के मामलों में विशेषज्ञ मानी जाती हैं।

सम्मान और पहचान

मधुबनी जिला अदालत के युवा वकील अतुल कुमार झा कहते हैं, “हमेशा देखा है कि अनीता मैडम अपनी कार से ही प्रैक्टिस करती हैं। इतने संघर्षों के बावजूद वह यहां की बेहतरीन क्रिमिनल वकीलों में से एक हैं।”

अनीता झा आज भी हर दिन अदालत आती हैं, अपनी कार में बैठकर मुवक्किलों से मिलती हैं और यह साबित करती हैं कि संघर्ष, आत्मसम्मान और हिम्मत के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती।

 

News Desk
Author: News Desk

हम हमेशा अपने पाठकों को सबसे ताजातरीन और सटीक समाचार प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं। यदि आपको किसी खबर या जानकारी में कोई अपडेट की आवश्यकता लगती है, तो कृपया हमें सूचित करें। हम आपकी सुझाव और सुधारों को ध्यान में रखते हुए हमारी सामग्री को अपडेट करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, यदि आपके पास कोई महत्वपूर्ण समाचार या प्रेस रिलीज है जिसे आप हमारे साथ साझा करना चाहते हैं, तो कृपया इसे हमारे ईमेल आईडी पर भेजें: RajasthanTVofficial(at)gmail (dot)com

Leave a Comment

Read More

[ays_poll id=1]

Read More