महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने हालिया नगर निकाय चुनावों के बाद चल रही सियासी खींचतान पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य की राजनीति अब “गुलामों का बाज़ार” बन चुकी है। मेयर पद को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच राज ठाकरे की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
राज ठाकरे यह बयान शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी समारोह की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अपना एक सोशल मीडिया पोस्ट भी पढ़ा और कहा कि राजनीति में कई बार लचीलापन दिखाना पड़ता है।
उन्होंने कहा,
“महाराष्ट्र की राजनीति अब गुलामों का बाज़ार बन गई है। कल्याण-डोंबिवली में जो हुआ, वह बेहद घिनौना है। यह सब आखिर किस दिशा में जा रहा है?”
कल्याण-डोंबिवली विवाद पर बयान
मुंबई के शणमुखानंद ऑडिटोरियम में शिवसेना (UBT) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उन्होंने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के मुद्दे पर पहले ही उद्धव ठाकरे और संजय राउत से बातचीत कर ली है। इस दौरान उन्होंने 20 साल पहले शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी बनाने के फैसले का भी जिक्र किया।
राज ठाकरे ने कहा,
“यह सब 20 साल पहले हुआ था। मैंने उससे बहुत कुछ सीखा और मुझे लगता है उद्धव ने भी सीखा होगा। अब इन बातों को पीछे छोड़ देना चाहिए।”
दो दशक बाद ठाकरे भाइयों की साथ वापसी
करीब दो दशकों तक राजनीतिक दूरी के बाद ठाकरे भाई हाल ही में बीएमसी चुनाव एक साथ लड़े। भले ही गठबंधन चुनाव जीत नहीं सका, लेकिन मराठी भाषी इलाकों में उसे जबरदस्त समर्थन मिला। दोनों दलों ने मिलकर 71 सीटें जीतीं, हालांकि एमएनएस के हिस्से सिर्फ 6 सीटें आईं।
KDMC में सियासी उलझन
इस बीच बड़ा सियासी मोड़ तब आया जब एमएनएस ने कल्याण-डोंबिवली में उद्धव ठाकरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया। यहां शिवसेना पूरी ताकत झोंक रही है ताकि 62 के बहुमत आंकड़े को पार कर बीजेपी को बाहर रखा जा सके। अगर शिंदे की सेना इसमें सफल होती है, तो इसे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के गृहक्षेत्र में बड़ी राजनीतिक जीत माना जाएगा।
एमएनएस नेता राजू पाटिल को शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे से समर्थन को लेकर बातचीत करते देखा गया। एमएनएस का कहना है कि यह फैसला कल्याण की स्थानीय इकाई ने लिया है।
नाराज़गी की अटकलें, लेकिन मंच पर साथ
इस फैसले से उद्धव ठाकरे के नाराज़ होने की खबरें सामने आईं और यहां तक अटकलें लगीं कि राज ठाकरे कार्यक्रम में नहीं आएंगे। लेकिन इन तमाम कयासों को खारिज करते हुए राज ठाकरे खुद शणमुखानंद ऑडिटोरियम पहुंचे और बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के कार्यक्रम में शामिल हुए।
Raj Thackeray Maharashtra Politics पर दिया गया उनका बयान साफ संकेत देता है कि मेयर चुनावों से पहले और बाद की राजनीति ने राज्य में नए सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: News Desk
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