दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि भारत वैश्विक स्तर पर शांति का संदेश दे रहा है और मानवता का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है जब पूरी दुनिया में शांति बनी रहे। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, डिजिटल नेतृत्व, सुशासन और सांस्कृतिक एकता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की सभ्यतागत परंपरा का उल्लेख करते हुए देश को संघर्षग्रस्त विश्व में “शांति का संदेशवाहक” बताया। उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा में पूरे विश्व में शांति की कामना की जाती रही है। मानवता का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है, जब पूरी दुनिया में शांति हो।” उन्होंने जोर दिया कि भारत लगातार वैश्विक मंच पर शांति का संदेश देता आ रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख किया, जिसके तहत सीमा पार आतंकी ढांचे को सटीक कार्रवाई में ध्वस्त किया गया। उन्होंने सियाचिन बेस कैंप, सुखोई और राफेल लड़ाकू विमानों तथा पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि देश की सेना, वायुसेना और नौसेना की तैयारियों पर जनता को पूरा भरोसा है।
भारत की विकास यात्रा में नारी शक्ति की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में नारी शक्ति की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने बताया कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं और पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 46 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का है।
उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। साथ ही, खेल, अंतरिक्ष, रक्षा और उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को बीते वर्ष का “स्वर्णिम अध्याय” करार दिया।
गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हाल के वर्षों में करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि वे दोबारा गरीबी के जाल में न फंसें। उन्होंने कहा कि “कोई भी भूखा न रहे” इस सिद्धांत के तहत करीब 81 करोड़ लोग केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। आदिवासी और वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान देना महात्मा गांधी के सर्वोदय के विचार को दर्शाता है।
सुशासन और डिजिटल नेतृत्व
राष्ट्रपति ने बताया कि भारतीय संविधान अब आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे “संवैधानिक राष्ट्रवाद” को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सुधारों और डि-रेगुलेशन से प्रशासनिक बाधाएं घटी हैं और नागरिकों व सरकार के बीच की दूरी कम हुई है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की अग्रणी भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के आधे से अधिक डिजिटल लेन-देन आज भारत में हो रहे हैं।
आर्थिक विकास और विकसित भारत
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया और कहा कि देश जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जीएसटी को स्वतंत्रता के बाद आर्थिक एकीकरण की सबसे बड़ी पहल बताया और आत्मनिर्भरता व स्वदेशी के सिद्धांतों को भविष्य की विकास यात्रा का आधार बताया।
सांस्कृतिक एकता और वंदे मातरम्
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान इस गीत ने भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर देशवासियों को एकजुट किया।
“उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता की बुनियाद हमारे पूर्वजों ने रखी,” उन्होंने कहा।
Author: News Desk
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