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Indian Air Force Rafale Deal-भारतीय वायुसेना का दो दशक पुराना फाइटर जेट खोज अभियान अब अपने अंतिम चरण में

Indian Air Force Rafale Deal

भारतीय वायुसेना द्वारा लगभग दो दशक पहले शुरू किया गया आधुनिक फाइटर जेट खरीदने का अभियान अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, भारत सरकार फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट खरीदने के समझौते को अंतिम मंजूरी देने और उस पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया में है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारतीय वायुसेना के लिए एक लंबे और चुनौतीपूर्ण इंतजार का अंत होगा।

फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह द्वारा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर तेजस Mk1A विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर की गई सख्त टिप्पणी ने इस समस्या को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2021 में ऑर्डर किए गए 83 तेजस Mk1A विमानों में से एक भी अब तक वायुसेना को नहीं मिला है। इससे वायुसेना की झुंझलाहट साफ झलकती है।

आज स्थिति यह है कि भारतीय वायुसेना के पास 1962 के बाद से सबसे कम फाइटर स्क्वाड्रन बचे हैं। स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले फिलहाल केवल लगभग 30 सक्रिय स्क्वाड्रन ही उपलब्ध हैं, जबकि चीन और पाकिस्तान से दोहरे खतरे को देखते हुए वायुसेना को पूरी क्षमता की सख्त जरूरत है।

यही कारण है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात के दौरान 114 राफेल जेट्स का यह बड़ा सौदा हरी झंडी पा सकता है।

मिराज से शुरू हुई कहानी

यह पूरी यात्रा 1999 के कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई, जब मिराज 2000 विमानों ने अपनी क्षमता से वायुसेना को बेहद प्रभावित किया था। उस समय बड़ी संख्या में मिग-21 विमान सेवा के अंतिम चरण में थे और स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) कार्यक्रम को परिपक्व होने में समय लगना तय था। इसलिए वायुसेना ने मिराज 2000-5 के 126 विमानों की योजना बनाई।

हालांकि 2004 में सरकार बदलने के बाद इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया और वैश्विक स्तर पर नए फाइटर जेट की तलाश शुरू हुई, जिसे बाद में MMRCA (मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रतियोगिता के नाम से जाना गया।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ और राफेल का चयन

MMRCA प्रतियोगिता में अमेरिका, रूस, स्वीडन और यूरोपीय देशों समेत छह प्रमुख फाइटर जेट शामिल थे। वर्षों की कठोर जांच और परीक्षण के बाद फ्रांसीसी राफेल को तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक रूप से सबसे उपयुक्त माना गया।

लेकिन लागत तेजी से बढ़कर करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिससे रक्षा मंत्रालय को पीछे हटना पड़ा। साथ ही, HAL में बनने वाले विमानों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी को लेकर भी मतभेद उभरे और सौदा ठंडे बस्ते में चला गया।

36 राफेल का समाधान और विवाद

2016 में NDA सरकार ने 126 विमानों की जगह 36 राफेल जेट्स को सीधे खरीदने का फैसला लिया। यह सौदा तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया था। हालांकि 2019 के चुनावों में राफेल सौदे को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद खड़े हुए, जिससे आगे की खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई।

इस बीच, मिग-21 विमानों की रिटायरमेंट और तेजस की देरी ने वायुसेना की स्थिति और कमजोर कर दी। सितंबर 2024 में आखिरी मिग-21 स्क्वाड्रन के रिटायर होने के बाद वायुसेना की ताकत ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।

MRFA: अब या कभी नहीं

अब MMRCA का ही नया रूप MRFA (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) सामने है। प्रस्तावित सौदे के तहत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल जेट खरीदे जाएंगे। इनमें से कुछ फ्रांस में बनेंगे, जबकि शेष भारत में उत्पादन लाइन पर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही मौजूदा राफेल विमानों को भारतीय हथियार प्रणालियों से लैस करने के लिए अपग्रेड भी शामिल होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के तेजी से बढ़ते फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर बेड़े को देखते हुए यह सौदा अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो यह भारतीय वायुसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूती से तैयार करेगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता न केवल एक खरीद प्रक्रिया का अंत होगा, बल्कि भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता को बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी साबित हो सकता है।

News Desk
Author: News Desk

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