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Mamata Banerjee Supreme Court SIR Case-काली शॉल, SIR की जंग: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी का हाई-वोल्टेज ड्रामा

Mamata Banerjee Supreme Court SIR Case

पश्चिम बंगाल में चुनाव नज़दीक आते ही राजनीतिक तापमान दिल्ली तक पहुँच गया। बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं और चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत में स्वयं दलीलें पेश कीं।

ममता बनर्जी सुनवाई से पहले ही सुप्रीम कोर्ट परिसर में पहुँच गईं। वह अपनी पहचान बन चुकी सफेद साड़ी में थीं, कंधे पर काली शॉल डाले हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह काली शॉल SIR प्रक्रिया के दौरान हुई कथित मौतों के विरोध और पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता का प्रतीक है।

कॉरिडोर से गुजरते समय वकीलों और सुरक्षाकर्मियों से घिरी ममता ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया, लेकिन मीडिया के सवालों से बचती रहीं। कोर्टरूम में उन्हें याचिकाकर्ता के रूप में आगे बैठने को कहा गया, लेकिन उन्होंने पहले दर्शक दीर्घा में बैठना चुना।

कोर्ट नंबर 1 खचाखच भरा हुआ था। जब करीब 12:45 बजे मामला पुकारा गया, तो ममता बनर्जी तृणमूल सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के साथ आगे आईं। आकार में भले ही वह आसपास मौजूद वरिष्ठ वकीलों से छोटी दिखें, लेकिन उनकी मौजूदगी ने पूरे कोर्टरूम में असर डाला।

शुरुआत में उन्होंने अपने वकीलों को बहस करने दी, लेकिन जब चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि मामूली वर्तनी की गलतियों पर नाम नहीं हटाए जा रहे हैं, तो ममता ने अदालत से स्वयं बोलने की अनुमति मांगी।

उन्होंने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ममता ने खुद को एक “साधारण नागरिक” बताते हुए कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए अदालत आई हैं। मुख्य न्यायाधीश ने उनकी बात सुनने के बाद उन्हें अपनी दलीलें रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया सत्यापन की जगह केवल नाम हटाने का जरिया बन गई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों से आए माइक्रो-ऑब्जर्वर बंगाली भाषा नहीं समझते और गलत अनुवादों को “तार्किक विसंगति” बताकर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शादी के बाद महिलाओं के नाम या पते में बदलाव को आधार बनाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे यह प्रक्रिया “महिला-विरोधी” बन गई है।

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा और राज्य सरकार को अधिकारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। ममता बनर्जी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के साथ ममता बनर्जी ने यह साफ कर दिया कि बंगाल की चुनावी लड़ाई अब सिर्फ सड़कों या राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत में भी लड़ी जाएगी।

 

News Desk
Author: News Desk

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