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दीपिंदर गोयल का ‘टेम्पल डिवाइस’: न्यूरोलॉजिस्ट ने किया खंडन, बोले– न तो वैज्ञानिक रूप से सिद्ध, न ही प्रमाणित

Deepinder Goyal Temple Device

जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अपने कनपटी (टेम्पल) पर पहने गए एक छोटे धातु उपकरण को लेकर चर्चा में आ गए। गोयल ने इसे ‘टेम्पल’ नाम का एक प्रयोगात्मक हेल्थ-टेक वियरेबल बताया, जो रियल टाइम में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह (सेरेब्रल ब्लड फ्लो) को मापने और ब्रेन हेल्थ को समझने का दावा करता है।

यह प्रयोग गोयल की नई रिसर्च फाउंडेशन से भी जुड़ा है, जो तथाकथित ग्रैविटी एजिंग हाइपोथेसिस का समर्थन करती है। इस सिद्धांत के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण जीवन भर मस्तिष्क में रक्त संचार पर दबाव डालता है, जिससे दिमाग को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और वह तेजी से बूढ़ा होता है। दावा किया गया है कि यह डिवाइस मस्तिष्क में रक्त प्रवाह पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को ट्रैक करता है।

हालांकि, यह डिवाइस सोशल मीडिया पर जिज्ञासा का विषय बनने के साथ ही विवादों में भी घिर गई। कई यूजर्स ने इसकी बनावट और उपयोग को लेकर सवाल उठाए। बहस तब और तेज हो गई जब AIIMS के एक पूर्व रेडियोलॉजिस्ट ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हुए इसे “अरबपतियों के लिए एक फैंसी खिलौना” बताया और कहा कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने बिना प्रमाणित हेल्थ टेक्नोलॉजी में निवेश को लेकर भी चेतावनी दी।

विशेषज्ञों की राय: एक बिंदु से पूरे मस्तिष्क का आकलन संभव नहीं

मारेंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), गुरुग्राम के चेयरमैन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण गुप्ता के अनुसार, किसी एक बिंदु पर लगाया गया उपकरण पूरे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को सही ढंग से नहीं माप सकता। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्सों, बड़ी और छोटी धमनियों तथा गहराई में स्थित रक्त नलिकाओं में रक्त प्रवाह अलग-अलग होता है। ऐसे में सिर्फ एक जगह से माप लेकर पूरे दिमाग की स्थिति का आकलन करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

क्या यह डिवाइस वास्तव में काम करती है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डिवाइस अभी तक एक प्रमाणित (validated) मेडिकल उपकरण नहीं है। यानी, इसके बारे में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं जो यह साबित करें कि यह वास्तव में क्या मापती है और कितनी सटीकता से मापती है। किसी भी मेडिकल डिवाइस को विश्वसनीय माने जाने से पहले विभिन्न परिस्थितियों में परीक्षण, सटीकता और निरंतरता की जांच जरूरी होती है, जो इस डिवाइस के मामले में नहीं दिखती।

यह डिवाइस मस्तिष्क के बाहर से सिग्नल लेती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ये सिग्नल दिमाग के अंदर गहराई में होने वाली प्रक्रियाओं को सही ढंग से दर्शाते भी हैं या नहीं।

क्या एक ही वियरेबल पूरे दिमाग का ब्लड फ्लो माप सकता है?

न्यूरोलॉजिस्ट साफ तौर पर कहते हैं—नहीं। मस्तिष्क में कई धमनियां होती हैं, जिनका रक्त प्रवाह अलग-अलग पैटर्न में होता है। एक ही स्थान पर लगा उपकरण पूरे मस्तिष्क की सभी धमनियों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

क्या एक बिंदु पर ब्लड फ्लो मापकर याददाश्त या न्यूरोडीजेनेरेशन को समझा जा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां बेहद जटिल होती हैं। इनमें लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स, खरबों सिनेप्स, रासायनिक प्रक्रियाएं, पोषण और रक्त प्रवाह शामिल होते हैं। सिर्फ एक जगह पर रक्त प्रवाह मापने से न तो संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) को समझा जा सकता है और न ही न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को।

कई मामलों में किसी एक धमनी में 100% ब्लॉकेज होने के बावजूद व्यक्ति सामान्य जीवन जीता है, क्योंकि दूसरी धमनियां उसकी भरपाई कर लेती हैं। इससे साफ है कि ब्लड फ्लो के पैटर्न को एक ही माप से नहीं समझा जा सकता।

किन परिस्थितियों में डॉक्टर ब्रेन ब्लड फ्लो मापते हैं?

डॉक्टर आमतौर पर स्ट्रोक, शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी, बेहोशी, बार-बार गिरना, या खड़े होने पर चक्कर आने जैसी स्थितियों में मस्तिष्क के रक्त प्रवाह की जांच करते हैं।

पहले से मौजूद प्रमाणित मेडिकल टूल्स

मस्तिष्क में रक्त प्रवाह मापने के लिए पहले से कई प्रमाणित और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले टूल्स मौजूद हैं, जैसे:

  • एंजियोग्राफी

  • CT एंजियोग्राफी

  • MRI एंजियोग्राफी

  • डॉप्लर अल्ट्रासाउंड

  • ट्रांसक्रेनियल डॉप्लर

निष्कर्ष

सरल शब्दों में कहा जाए तो, मौजूदा समय में यह वियरेबल ब्रेन मॉनिटरिंग डिवाइस किसी भी तरह की क्लिनिकल उपयोगिता साबित नहीं कर पाई है। इसके पीछे न तो कोई स्पष्ट वैज्ञानिक परिकल्पना है, न ही मजबूत शोध आधार और न ही प्रमाणित डेटा। मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां वर्षों में विकसित होती हैं, न कि कुछ दिनों या हफ्तों में। ऐसे में बिना दीर्घकालिक और ठोस शोध के इस तरह के दावों को वैज्ञानिक या चिकित्सकीय रूप से विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

News Desk
Author: News Desk

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