भारतीय खेल प्रशासन के सबसे महत्वाकांक्षी और विवादास्पद चेहरों में शुमार सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को पुणे में 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कलमाड़ी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने उस दौर में ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय खेलों की संभावनाओं को पहचाना, जब भारत में बहुत कम लोग इस दिशा में सोचते थे। हालांकि, उनकी उपलब्धियों पर 2010 राष्ट्रमंडल खेल घोटाले की छाया हमेशा बनी रहेगी।
सुरेश कलमाड़ी ने भारतीय खेल कैलेंडर को मजबूती देने वाले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खड़े किए और दुनिया के बड़े-बड़े खिलाड़ियों को भारतीय मैदानों तक लाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, गिरफ्तारी और सत्ता से पतन ने उनकी पूरी विरासत को दागदार कर दिया।
एक करियर राजनेता रहे कलमाड़ी ने 1987 में भारतीय खेल प्रशासन में राष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा, जब वे एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के अध्यक्ष बने। वे इस पद पर 19 वर्षों तक बने रहे। इसके बाद 1996 में उन्हें इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) का अध्यक्ष चुना गया, जहां से उन्होंने लगातार 15 वर्षों तक नेतृत्व किया। इन दोनों अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने भारतीय खेल जगत पर गहरी छाप छोड़ी।
एथलेटिक्स प्रमुख के रूप में, कई बार लोकसभा और राज्यसभा सांसद रहे कलमाड़ी ने 1989 से 1998 के बीच नई दिल्ली में आठ अंतरराष्ट्रीय ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया। इनमें 1989 की एशियन चैंपियनशिप भी शामिल थी, जो पहली बार भारत में आयोजित हुई। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी ट्रैक लीजेंड कार्ल लुईस जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को भारत बुलाया, ताकि खेल की लोकप्रियता बढ़े। बाद में वे एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने और 1990 में एशियन ग्रां प्री मीट की शुरुआत की।
IOA अध्यक्ष के तौर पर, खेल प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ लोग कलमाड़ी को एक संसाधन-संपन्न और प्रभावशाली प्रशासक मानते हैं। 1964 से 1974 तक भारतीय वायुसेना में सेवा दे चुके कलमाड़ी को नेशनल गेम्स को पुनर्जीवित करने का श्रेय भी दिया जाता है, जो 1987 के बाद छह वर्षों तक आयोजित नहीं हो पाए थे।
2010 राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के महासचिव रहे ललित भानोट, जब कलमाड़ी इसके अध्यक्ष थे, ने उन्हें ‘दूरदर्शी’ बताया। भानोट के अनुसार, “एक खेल प्रशासक के रूप में वे दूरदर्शी थे और उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल, अफ्रो-एशियन गेम्स और नियमित नेशनल गेम्स जैसे आयोजनों के जरिए भारतीय खेलों में सकारात्मक बदलाव किए। वे कड़े अनुशासन वाले प्रशासक थे और यह सुनिश्चित करते थे कि काम समय पर और बेहतरीन ढंग से पूरा हो। साथ ही, वे खिलाड़ियों की बात सुनने के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे।”
हालांकि, इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद, सुरेश कलमाड़ी का नाम हमेशा Suresh Kalmadi Commonwealth Games Scandal से जुड़ा रहेगा, जिसने उनके लंबे और प्रभावशाली करियर को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया।
Author: News Desk
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