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आत्मसमीक्षा से रचना अधिक परिष्कृत और प्रभावशाली बनती है : नंद भारद्वाज

जयपुर। कलमकार मंच एवं पिंकसिटी प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य पुस्तक लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ साहित्यकारों, आलोचकों, कवियों और पत्रकारों ने साहित्य के समकालीन सरोकारों, छंद एवं मुक्तछंद की प्रासंगिकता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की चुनौतियों पर सार्थक चर्चा की। समारोह में तीन महत्वपूर्ण कृतियों—अनिल सक्सेना ‘ललकार’ के आलेख संग्रह ‘21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन’, साधना जोशी ‘प्रधान’ के गीत-गीतिका संग्रह ‘ठूँठ पर खिले पलाश’ तथा इंदु सिन्हा ‘इंदु’ के कहानी संग्रह ‘उन दिनों प्रेम’ का लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि किसी भी लेखक के लिए आत्मसमीक्षा अत्यंत आवश्यक है। लेखक को अपनी रचना का पहला और सबसे कठोर पाठक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मसमीक्षा के माध्यम से रचना अधिक परिष्कृत, संतुलित और प्रभावशाली बनती है तथा अनावश्यक सामग्री को हटाने का अवसर मिलता है।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ आलोचक दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि साहित्य की सभी विधाओं का अध्ययन लेखक के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परंपरा कोई बंधन नहीं, बल्कि वह मजबूत आधार है जिस पर नई सृजनात्मक संभावनाओं का विकास होता है। उन्होंने बदलते समय की संवेदनाओं को समझते हुए लेखन करने तथा एआई की चुनौतियों के बीच साहित्य की मौलिकता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि साहित्य की प्रत्येक विधा समय के साथ विकसित होती रहती है। छंद और मुक्तछंद दोनों ने अपने-अपने स्तर पर साहित्य को समृद्ध किया है तथा अभिव्यक्ति के नए आयाम प्रदान किए हैं।

वरिष्ठ आलोचक एवं विचारक राजाराम भादू ने कलमकार मंच की साहित्यिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मंच ने हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा को अपने आप में एक संस्था बताते हुए कहा कि मंच ने लेखक और प्रकाशक के बीच संवाद को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि साहित्य का दायित्व समाज के यथार्थ को सामने लाना है और कविता का वास्तविक मूल्य उसके कथ्य, संवेदना और संदेश में निहित होता है।

वरिष्ठ शायर लोकेंद्र कुमार सिंह ‘साहिल’ ने कहा कि कविता और कहानी मूलतः सुनने और सुनाने की विधाएं हैं। उन्होंने कवियों को व्यापक अध्ययन की सलाह देते हुए कहा कि कविता में भाव और विचार का संतुलित समन्वय होना चाहिए। उन्होंने छंद की महत्ता पर बल देते हुए एआई के माध्यम से लिखी जा रही कविताओं को साहित्य के सामने उभरती चुनौती बताया।

कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में अनिल सक्सेना ‘ललकार’, साधना जोशी ‘प्रधान’ और इंदु सिन्हा ‘इंदु’ ने अपनी-अपनी पुस्तकों और लेखन-दृष्टि पर विचार रखे। अनिल सक्सेना ने बताया कि उनकी पुस्तक जीवनानुभवों और साहित्यिक यात्राओं पर आधारित है। साधना जोशी ने छंदबद्ध गीतों की परंपरा का समर्थन करते हुए अतुकांत कविता के नाम पर लिखी जा रही कमजोर रचनाओं की आलोचना की। वहीं इंदु सिन्हा ने अपने कहानी-संग्रह ‘उन दिनों प्रेम’ की रचनात्मक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

वरिष्ठ लेखक फारूक अफरीदी ने अनिल सक्सेना के लेख-संग्रह को कला, संस्कृति, पर्यटन और साहित्य से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसमें पिछले डेढ़ दशक के साहित्यिक अनुभवों और यात्राओं का मूल्यवान संकलन है। उन्होंने साहित्यिक आयोजनों और विमर्शों के दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

समीक्षक कविता मुखर ने ‘उन दिनों प्रेम’ संग्रह की बारह कहानियों में प्रेम के विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय आयामों की चर्चा करते हुए लेखिका की यथार्थवादी दृष्टि की सराहना की। वहीं कवि-लेखक प्रेमचंद गांधी ने साधना जोशी के काव्य-संग्रह को अध्यात्म, समाज, संस्कृति और समकालीन सरोकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण काव्य दस्तावेज बताया।

समारोह में चरणसिंह पथिक, गजेन्द्र एस. श्रोत्रिय, निशांत मिश्रा, मुकेश मीणा और राजकुमार शर्मा सहित अनेक साहित्यकारों एवं वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बदलते समय में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है तथा लेखक को निरंतर अध्ययन, आत्मसमीक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग रहते हुए सृजन करना चाहिए।

इस अवसर पर साहित्य, कविता, कहानी, छंद, मुक्तछंद, समकालीन लेखन, साहित्यिक आंदोलन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे विषयों पर गंभीर साहित्यिक विमर्श हुआ। कार्यक्रम में बसंत व्यास, श्याम माथुर, राजेश शर्मा, नवल पाण्डे, अनिल शर्मा, मुकेश चौधरी, आशा पटेल, महेश कुमार, जनित, संदीप मील, चंद्रप्रकाश गुप्ता, नितिन यादव, मारध्वज सिंह, प्रेरक मिश्रा, डॉ. नरेन्द्र प्रधान, विनिता, डॉ. विदुषी, ओमेन्द्र मीणा, अक्षत मिश्रा और संतोष शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में वरिष्ठ साहित्यकार नवल पाण्डे ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

News & PR Desk
Author: News & PR Desk

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